परिचय मिथिला (An introduction of MITHILA)


  •       मिथिला......! ....एक सांस्कृतिक संबोधन...। 'मिथिला' नाम मानस-पटल पर आने के साथ हीं मन-मस्तिष्क के कोने में कई पौराणिक, ऐतिहासिक, दृश्य कौंधने लगते हैं ---- खेतों में स्वयं हल चलाते विदेहराज जनक, भगवान श्रीराम की शक्ति जनकनंदिनी जगतमाता सीता का अवतरण, याज्ञवल्क्य-अष्टावक्र जैसे महा मनीषियों के दैदीप्य भाल, गार्गी-मैत्रेयी जैसी परम विदूषी सरस्वतीस्वरूपा ललनाओं के  सौम्य, स्निग्ध मुखमण्डल.....। ....और न जाने क्या-क्या मन के तारों को झंकृत करने लगते हैं ।

  •  .....कीर(सुग्गा)-दम्पति का तत्त्व-वाचन,  जगद्गुरु शंकराचार्य से भारती-मंडन का ऐतिहासिक शास्त्रार्थ...। ...कपिल (सांख्य), कणाद(वैशेषिक), गौतम (न्याय), जैमिनी (मीमांसा) की परम तेजस्वी लेखनी से निःसृत भारतवर्ष के कुल छः दर्शनों(Philosophies) में से चार दर्शनों की अविकल धारा...........।

  •      भारतीय सांस्कृतिक जीवन-शैली को जीवंत रूप में देखना हो तो मिथिला के गांव पधारिए.......। भारतभूमि पर सबसे नवीन मिट्टी में पनपी मिथिलांचल की लोक-संस्कृति अपने सहज, सरल व निश्छल स्पर्श से आपको भावों से भर देगी ...। यहाँ की परोपकारी व स्वभावतः सहयोगी(helpful) मनोवृत्ति इसे विशेष पहचान उपलब्ध कराती है । नदियों के नैहर (यहाँ नदियों का जाल बिछा है, एक साथ इतनी नदियाँ भारत के अन्य किसी भू-भाग में नहीं पायी जाती) का लोक-जीवन हर साल बाढ़ की प्रलयकारी विभीषिका का सामना करते रहने से परम जीवट व प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं एवं परिजन -  सहित अपने समाज की जीवन-रक्षा करने में अत्यंत निपुण है......।
        
                          

         .             ✍️---डॉ. लक्ष्मी कुमार कर्ण








टिप्पणियाँ

  1. प्रणाम सर

    अत्यंत सुंदर अंकन सर

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